देहरादून हरिद्वार
हरिद्वार वन प्रभाग के श्यामपुर रेंज में दो बाघों के शिकार मामले ने पूरे उत्तराखंड में हड़कंप मचा दिया है। मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए वन विभाग ने श्यामपुर रेंज के रेंजर विनय कुमार राठी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। प्रमुख वन संरक्षक (HoFF) उत्तराखंड द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि बाघ शिकार प्रकरण में प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आने पर यह कदम उठाया गया है।
बताया जा रहा है कि 25 मई को जारी आदेश में मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल की संस्तुति के बाद यह कार्रवाई की गई। निलंबन अवधि के दौरान रेंजर विनय राठी को हरिद्वार वन प्रभाग कार्यालय से संबद्ध रखा जाएगा। इस फैसले के बाद वन विभाग में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि पिछले कई महीनों से हरिद्वार वन प्रभाग लगातार वन्यजीव अपराधों को लेकर सवालों के घेरे में रहा है।
दरअसल कुछ दिन पहले श्यामपुर रेंज के सजनपुर बीट क्षेत्र में दो बाघों के शव मिलने से सनसनी फैल गई थी। शुरुआती जांच में सामने आया कि शिकारियों ने जहर देकर दोनों बाघों को मौत के घाट उतारा। इतना ही नहीं, शिकार के बाद बाघों के पंजे भी काटकर ले जाए गए, जिससे वन्यजीव तस्करी की आशंका और गहरा गई है।
वन विभाग ने मामले में अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है, लेकिन बाघों के गायब पंजे अभी तक बरामद नहीं हो पाए हैं। यही वजह है कि इस पूरे मामले को बेहद गंभीर माना जा रहा है। जांच एजेंसियां अब गश्त व्यवस्था, निगरानी तंत्र और स्थानीय स्तर पर हुई लापरवाही की पड़ताल में जुटी हैं।
सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी NTCA भी इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और जल्द उसकी टीम उत्तराखंड पहुंच सकती है। अगर ऐसा होता है तो हरिद्वार वन प्रभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो सकते हैं।
गौरतलब है कि हरिद्वार वन प्रभाग पहले भी कई विवादों में रह चुका है। सांपों के जहर की तस्करी, हाथियों की संदिग्ध मौत और अब बाघ शिकार की घटनाओं ने वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आने वाले महाकुंभ को देखते हुए भी यह मामला बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच वन क्षेत्रों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा। ऐसे में वन्यजीवों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
फिलहाल रेंजर के निलंबन को वन विभाग की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इससे भविष्य में वन्यजीव अपराधों पर रोक लग पाएगी या फिर जंगलों में शिकारी यूं ही सक्रिय रहेंगे।
