हरिद्वार
हरिद्वार वन निगम में इन दिनों खनन का खेल जोरों पर चल रहा है, लेकिन इसके पीछे की हकीकत चौंकाने वाली है।दरअसल, वन निगम के कर्मचारियों द्वारा जिन ट्रैक्टरों और डंपरों को खनन कार्य के लिए रजिस्टर्ड किया गया है, उनमें से कई वाहनों की फिटनेस खत्म हो चुकी है — यानी ये वाहन तकनीकी रूप से सड़क पर चलने योग्य ही नहीं हैं।फिर भी, इन्हीं वाहनों से खनन कराया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि आखिर बिना फिटनेस वाले वाहन वन निगम की सूची में कैसे शामिल हैं?

क्या यह पूरा मामला विभागीय मिलीभगत का संकेत नहीं देता? इस पर जब हमारे संवाददाता ने आरएम शेर सिंह से बात की, तो उन्होंने जांच की बात कही। लेकिन एक सप्ताह बीत जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस जांच या कार्रवाई सामने नहीं आई है।हमारे पास वन निगम में रजिस्टर्ड 69 वाहनों की लिस्ट मौजूद है, जिनमें से कई की फिटनेस एक्सपायर पाई गई है। इसके बावजूद वे खुलेआम खनन कार्य में जुटे हैं।

इस विषय पर डीएलएम हरिद्वार रोहित श्रीवास्तव से भी बातचीत की गई, जिन्होंने कार्रवाई का आश्वासन तो दिया लेकिन ज़मीनी स्तर पर कुछ होता नहीं दिखा।
वहीं, जब एमडी नीना ग्रेवाल से इस संबंध में संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन तक रिसीव नहीं किया।
अब बड़ा सवाल यही –
बिना फिटनेस वाले वाहनों से खनन कैसे चल रहा है?
और क्या वन निगम के अफसरों की इस खामोशी के पीछे कोई “साझीदार” सच्चाई तो नहीं छिपी?
