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हरिद्वार लक्सर
हरिद्वार वन प्रभाग में अवैध गतिविधियों को लेकर एक बार फिर बड़ा मामला सामने आया है। उप वन संरक्षक स्वप्निल अनिरुद्ध ने लक्सर रेंज के भोगपुर क्षेत्र में अवैध खनन के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए वन आरक्षी वैभव सिंगल को निलंबित कर दिया है, जबकि बीट अधिकारी एवं वन दरोगा नारायण राठौर को तत्काल प्रभाव से हटाकर वन प्रभाग हरिद्वार में अटैच कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि जनवरी माह में भोगपुर क्षेत्र के आरक्षित वन क्षेत्र से अवैध रूप से खनन किए जाने की शिकायत विभाग को मिली थी। शिकायत के बाद जब जांच कराई गई तो जांच में यह स्पष्ट हो गया कि आरक्षित वन क्षेत्र में खनन हुआ है। इसके बाद विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए वहां तैनात कर्मचारियों पर गाज गिरा दी।
हालांकि इस कार्रवाई के बाद कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि बिना वन क्षेत्राधिकारी के संरक्षण के कोई भी वन दरोगा या वन आरक्षी इस तरह का कार्य नहीं कर सकता। लेकिन अक्सर देखा जाता है कि कार्रवाई केवल छोटे कर्मचारियों तक ही सीमित रह जाती है, जबकि बड़े अधिकारी बच निकलते हैं। विभाग की इस कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं कि जब किसी क्षेत्र में अवैध गतिविधि होती है तो सबसे पहले उस क्षेत्र के प्रभारी अधिकारी को हटाकर निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। तभी छोटे कर्मचारी बिना दबाव के सच्चाई सामने ला सकते हैं। लेकिन अक्सर ऐसा देखने को नहीं मिलता और कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक ही सीमित रह जाती है। अगर इसी तरह की बात रुड़की रेंज क्षेत्र की करें तो पिछले कई महीनों से यहां लगातार हरे-भरे फलदार प्रतिबंधित पेड़ों का अवैध कटान हो रहा है। खबरें भी लगातार सामने आती रही हैं, लेकिन अब तक किसी भी कर्मचारी या अधिकारी के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई देखने को नहीं मिली है।
हालांकि जानकारी मिली है कि UK भारत में खबर प्रकाशित होने के बाद रुड़की सुरक्षाबल के प्रभारी मनोज भारती का स्थानांतरण जरूर किया गया है। लेकिन रेंज क्षेत्र में तैनात वन आरक्षी, वन दरोगा और वन क्षेत्राधिकारी के खिलाफ किसी प्रकार की कोई स्पष्ट कार्रवाई या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब अवैध खनन के मामले में वन आरक्षी को निलंबित और वन दरोगा को अटैच किया जा सकता है, तो अवैध तरीके से हरे-भरे फलदार पेड़ों की कटाई के मामले में ऐसी कार्रवाई क्यों नहीं होती। अगर विभाग इस तरह के मामलों में सख्ती दिखाए तो संभव है कि भविष्य में अवैध कटान पर रोक लग सके और विभाग के अन्य कर्मचारियों को भी सख्त संदेश मिले।
UK भारत विभाग के उच्च अधिकारियों से कुछ बड़े सवाल पूछता है—-
1.जब आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध खनन होने पर वन आरक्षी और वन दरोगा पर कार्रवाई हो सकती है, तो वन क्षेत्राधिकारी पर क्यों नहीं?
2.जब अवैध खनन पर निलंबन और अटैचमेंट जैसी कार्रवाई संभव है, तो अवैध पेड़ कटान पर वही सख्ती क्यों नहीं दिखाई जाती?
3.एक ही विभाग में कार्रवाई की दोहरी व्यवस्था क्यों दिखाई देती है? नियम सबके लिए समान क्यों नहीं हैं?
4.अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद विभाग के उच्च अधिकारी कोई ठोस कार्रवाई करते हैं या नहीं – यह फिलहाल भविष्य के गर्भ में छिपा है।
