रुड़की भगवानपुर
रुड़की रेंज क्षेत्र में हरे-भरे फलदार पेड़ों का अवैध कटान थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीती रात एक बार फिर भगवानपुर अनुभाग की द्वितीय बीट में वन माफियाओं ने लगभग दो दर्जन हरे-भरे आम के पेड़ों पर आरी चला दी। लगातार हो रहे इस अवैध कटान ने वन विभाग और उद्यान विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इन दिनों वन माफिया काफी सक्रिय हो गए हैं और आधुनिक इलेक्ट्रिक मशीनों से पेड़ों को काट रहे हैं। इन मशीनों की आवाज दूर तक सुनाई देती है, लेकिन इसके बावजूद सड़क किनारे बड़ी संख्या में पेड़ काट लिए जाते हैं और विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगती।हालांकि जब इस तरह के मामलों में वन विभाग के अधिकारियों से बात की जाती है तो कई बार जिम्मेदारी उद्यान विभाग पर डाल दी जाती है, जबकि उद्यान विभाग के अधिकारी कार्रवाई का हवाला देकर मामला टालते नजर आते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि आज तक किसी बड़े स्तर की कठोर कार्रवाई सामने नहीं आई है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब क्षेत्र में बीट अधिकारी, सेक्शन अधिकारी, रेंजर और एसडीओ के साथ-साथ सुरक्षा बल की टीमें अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए तैनात हैं, तो आखिरकार इस तरह की घटनाएं कैसे हो जाती हैं। आखिर वह सुरक्षा तंत्र कहां चला जाता है जब रात के अंधेरे में दर्जनों पेड़ों पर आरी चल जाती है।यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या बिना विभागीय मिलीभगत के इतनी बड़ी मात्रा में पेड़ों का कटान संभव है। क्योंकि जब अवैध लकड़ी का अविवहन होता है तो सड़कों पर तैनात चेकिंग टीमें भी कहीं नजर नहीं आतीं। अक्सर देखा जाता है कि जब मामला मीडिया के संज्ञान में आता है तो अधिकारी मौके पर पहुंचकर केवल लीपापोती करने में जुट जाते हैं।

इस मामले में जब हमारी टीम ने बीट अधिकारी से बात की तो उन्होंने माना कि अवैध कटान हुआ है और इस मामले में केस दर्ज करने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ वन माफियाओं ने उनके साथ बदतमीजी की और उन पर आरोप भी लगाए। हालांकि यह आरोप कितने सही हैं, यह जांच के बाद ही साफ हो पाएगा।दूसरी ओर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्षेत्र में तैनात वन दरोगा और अन्य जिम्मेदार अधिकारी उस समय कहां थे। क्योंकि इससे पहले भी इसी इलाके में सैकड़ों पेड़ अवैध तरीके से काटे जा चुके हैं। यदि बीट अधिकारी के साथ वन माफिया बदतमीजी कर रहे हैं, तो उच्च अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।सूत्रों के अनुसार पिछले दो से ढाई महीनों के भीतर क्षेत्र में प्रतिबंधित फलदार पेड़ों का अवैध कटान काफी बढ़ गया है। वहीं जब पहले लगभग ढाई सौ पेड़ काटे जाने के मामले में वन दरोगा से सवाल किया गया कि क्या कोई मुकदमा दर्ज हुआ है, तो उन्होंने इस पर चुप्पी साध ली, जिससे कई तरह के संदेह पैदा हो रहे हैं।

हालांकि यह भी सच है कि जब से उपप्रभागीय वनाधिकारी ज्वाला प्रसाद गौड़ ने कार्यभार संभाला है, तब सुरक्षा बल ने कई बार अवैध खनन और लकड़ी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां पकड़ी हैं। लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि हाल के दिनों में कार्रवाई की रफ्तार अचानक धीमी क्यों पड़ गई है।फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं- क्या वन माफिया बेखौफ होकर जंगलों को उजाड़ रहे हैं, या फिर कहीं न कहीं विभागीय तंत्र की लापरवाही या मिलीभगत इसके पीछे जिम्मेदार है।
इस पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट और अधिकारियों के इंटरव्यू के साथ हमारा विशेष कार्यक्रम सोमवार को प्रसारित किया जाएगा, जिसमें संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी सामने लाया जाएगा।
