रुड़की हरिद्वार
हमेशा देखा गया है कि जब भी किसी विभाग में कार्रवाई होती है तो गाज गिरती है केवल छोटे कर्मचारियों पर – जबकि बड़े अधिकारी बच निकलते हैं। सवाल ये उठता है कि क्या गलतियां सिर्फ छोटे कर्मचारी ही करते हैं?
इसी कड़ी में एक और मामला सामने आया है वन विभाग से, जहां 2 दिन पहले रुड़की रेंज के मंगलौर चौकी क्षेत्र में तैनात फॉरेस्ट गार्ड रजत को निलंबित कर दिया गया। आरोप है कि उसकी बीट में यूकेलिप्टस के सरकारी पेड़ वन माफिया चोरी से काटकर ले गए और इसकी सूचना विभाग को समय पर नहीं मिल पाई।
लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि जिस फॉरेस्ट गार्ड पर कार्रवाई की गई, वह नई भर्ती का कर्मचारी था और वह महज़ कुछ ही महीने पहले रुड़की रेंज में ट्रांसफर होकर ड्यूटी पर आया था। संभवतः उसे अभी तक अपनी पूरी बीट का क्षेत्र भी ठीक से समझने का मौका नहीं मिला हो। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या विभाग ने जल्दबाज़ी में केवल ‘छोटे कर्मचारी’ पर ही कार्रवाई करके अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली?
जबकि उसी क्षेत्र में लंबे समय से वन क्षेत्राधिकारी और सेक्शन अधिकारी तैनात हैं – क्या उनकी जिम्मेदारी नहीं बनती कि वे अपने अधीन क्षेत्र में होने वाले अवैध पातन पर निगरानी रखें? आखिरकार संरक्षण की जिम्मेदारी केवल एक गार्ड की तो नहीं हो सकती।
यह कोई पहला मामला नहीं है – लगातार ऐसे अवैध पातन के मामले सामने आते रहे हैं। माना जाए तो अगर सुरक्षाबल कर्मी हर वक्त सक्रिय न रहें, तो रेंज क्षेत्र के जंगलों से पेड़ पूरी तरह गायब हो सकते हैं।
अब बड़ा सवाल यही है –
क्या कार्रवाई सिर्फ छोटे कर्मचारियों तक सीमित रहेगी, या कभी बड़े अधिकारियों तक भी पहुंचेगी?
