रुड़की
गंगनहर कोतवाली क्षेत्र के पाडली गुर्जर में हुए प्रथम श्रेणी के वन्यजीव अजगर की हत्या के मामले को लगभग 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन हत्यारे अब भी वन विभाग की पकड़ से बाहर हैं। इस घटना ने न सिर्फ वन्यजीव संरक्षण कानून की गंभीरता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
सूत्रों के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद पीएफए ने डीएफओ हरिद्वार को शिकायत दी थी। इसके बाद मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने जमीन में दफन अजगर का शव बरामद किया और पोस्टमार्टम के लिए भेजा। वन विभाग ने मुकदमा भी दर्ज कर लिया, लेकिन उसके बाद से कार्रवाई ठप पड़ गई।
वन क्षेत्राधिकारी विनय कुमार राठी, जो खुद को वन्यजीव संरक्षण के प्रति समर्पित बताते हैं और अतीत में कई शिकारियों को जेल भिजवाने का दावा करते हैं, इस बार सवालों के घेरे में हैं। जब उनसे इस मामले पर बात की गई तो उन्होंने अपने पुराने सफल अभियानों का ज़िक्र किया, लेकिन पाडली गुर्जर में अजगर के हत्यारों की गिरफ्तारी पर कोई ठोस जवाब नहीं दिया और अभी भी हत्यारे बेफिक्र घूम रहे है।
स्थानीय लोगों और वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि मामले की जांच में जानबूझकर देरी की जा रही है। सवाल यह भी है कि क्या यह मामला फाइलों में दबा दिया जाएगा या फिर वन्यजीव हत्या करने वाले आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया जाएगा।
फिलहाल, सबकी निगाहें वन विभाग की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं, लेकिन 10 दिन बीत जाने के बाद भी आरोपियों का फरार रहना विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना होगा की विभाग कब तक और केसी कार्यवाही करता है या फिर मामला ठंडे बसते मे ही रहता है और वन विभाग के उच्चधिकारी किस तरह को कार्यवाही करते है।
