रुड़की मंगलौर
एक ओर जहां उद्यान और वन विभाग की ओर से इस बार प्रतिबंधित पेड़ों के कटान की अनुमति नहीं दी गई है, वहीं दूसरी ओर वन माफिया इतने सक्रिय हो गए हैं कि वे रात के अंधेरे में फलदार हरे-भरे पेड़ों का कटान कर रहे हैं। अब यह उनकी चालाकी कहे या फिर मिली भगत का बड़ा खेल!

रुड़की रेंज में वन क्षेत्रधिकारी बदलते ही अवैध कटान का खेल हुआ शुरू मंगलौर क्षेत्र में सूत्रों के अनुसार तीन जगह चल रहा प्रतिबंधित आम के पेड़ो का अवैध कटान यह मामला नारसन प्रथम बीट का आपको बता रहे है वही दूसरा मामला भी जल्द होगा उजागर सबका होगा पर्दाफास केवल UK भारत पर। वही भगवानपुर क्षेत्र की काली नदी चौकी के पास और अन्य क्षेत्र से भी हुआ है अवैध कटान जिसका जल्द करने वाले है खुलासा।
मंगलौर में इसका जीता-जागता सबूत अनुभाग मंगलौर चौकी क्षेत्र के नारसन प्रथम बीट से सामने आया है। बताया जा रहा है कि यहां तैनात बीट अधिकारी कार्रवाई करने में असमर्थ नजर आ रहे हैं, जिससे यह संदेह गहराता जा रहा है कि कहीं विभागीय मिलीभगत के चलते तो यह अवैध कटान नहीं हो रहा है।

मंगलौर वह क्षेत्र है जिसे कभी फलों की नगरी कहा जाता था, सबसे ज्यादा फलो का उत्पादन यही से होता था लेकिन अब लगातार यहां से फलदार पेड़ों का अवैध कटान जारी है। स्थिति यह है कि निचले स्तर से लेकर उच्च स्तर तक के अधिकारी इस पर आंखें मूंदे बैठे हैं।
वहीं जब इस संबंध में क्षेत्र अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने मामले की जानकारी न होने की बात कही। लेकिन सवाल यह उठता है कि जिस बीट में यह सब हो रहा है, वहां का फॉरेस्ट गार्ड स्थानांतरण होने के बावजूद भी उसी जगह पर कैसे तैनात है?

सूत्रों के अनुसार, यह बीट बेहद ‘मलाईदार’ मानी जाती है, और संभवतः इसी वजह से संबंधित कर्मचारी ने अब तक अपनी पोस्ट नहीं छोड़ी है। यह स्थिति वन विभाग के उच्च अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।
अब देखना यह होगा कि हरे-भरे आम के पेड़ों के अवैध कटान पर विभाग कब सख्त कार्रवाई करता है – या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
वही जानकरी के अनुसार एक RTI कार्यकर्ता ने बताया है की वन विभाग में कोई भी अधिकारी कर्मचारी अधिकतम 10 वर्ष ही एक जिले में ड्यूटी दे सकता है लेकिन मंगलौर में अनुभाग अधिकारी को भी लगभग हरिद्वार जिले में 10 वर्ष से अधिक का समय हो गया है परन्तु विभाग कहाँ सोया है ऐसा क्या है रुड़की रेंज में जों आ जाता है जाना ही नहीं चाहता इस विषय पर अब देखना यह होगा की स्थानांतरण हो रखे हैं फॉरेस्ट गार्ड और एक ही जिले में समय से अधिक ड्यूटी दे चुके फॉरेस्टर(वन दरोगा)पर किस तरह की कार्यवाही होगी यह देखना होगा हालांकि इस विषय पर UK भारत उच्च अधिकारियों से भी बात करेगा।
