हरिद्वार/रुड़की
वन विभाग में जारी स्थानांतरण आदेश एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। रुड़की रेंज से जुड़े दो वन आरक्षी डीएफओ हरिद्वार के आदेश के बावजूद आज तक अपनी नई तैनाती पर नहीं पहुँचे हैं। मामला अब बड़ा सवाल खड़ा करता है कि आखिर इन कर्मचारियों को रिलीव क्यों नहीं किया जा रहा और रुड़की रेंज की ड्यूटी छोड़ने से यह इतना परहेज़ क्यों कर रहे हैं।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले डीएफओ हरिद्वार ने रेंज और सुरक्षाबल दोनों में तैनात वनकर्मियों के स्थानांतरण आदेश जारी किए थे। आदेश मिलते ही जिन कर्मचारियों का ट्रांसफर हुआ, उन्हें रेंज से रिलीव कर सुरक्षाबल में भेज दिया गया। लेकिन रुड़की सुरक्षाबल से जुड़े दो वन आरक्षी अभी भी यही टिके है,ईन्हें सीधे हरिद्वार सुरक्षाबल में रिपोर्ट करना था,और अब तक यह वहाँ नहीं पहुँचे।
यानी मामला यह है कि जिन रेंज के वनकर्मियों का ट्रांसफर हुआ, उन्हें तो रिलीव कर दिया गया, मगर यह दोनों आरक्षी एसडीओ रुड़की की सुरक्षाबल में ही हैं।

यही नहीं, इन दोनों कर्मचारियों पर पहले भी आरोप लग चुके हैं। बावजूद इसके, न तो ट्रांसफर आदेश का सम्मान हो रहा है और न ही विभागीय अनुशासन का। यह सीधे-सीधे डीएफओ हरिद्वार के आदेशों की अनदेखी है। सवाल यह भी खड़ा होता है कि क्या एसडीओ रुड़की खुद को डीएफओ से बड़ा समझते हैं या फिर इनके और इन दोनों वनकर्मियों के बीच ऐसा कोई समीकरण है, जिसकी वजह से यह रुड़की रेंज छोड़ना ही नहीं चाहते।

सूत्र बताते हैं कि रुड़की रेंज लंबे समय से विवादों में घिरा रहा है। हाल ही में सुरक्षाबल की टीम ने एक अवैध लकड़ी से भरी गाड़ी को पकड़ा, तभी यह पूरा मामला सामने आया कि आखिर यह दोनों वन आरक्षी अब तक नई तैनाती पर क्यों नहीं पहुँचे।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि रुड़की रेंज में आखिर ऐसा क्या है, जिसकी वजह से ये कर्मचारी यहाँ से हिलना ही नहीं चाहते। क्या यह सिर्फ ड्यूटी का मोह है या फिर यहाँ कोई और “मलाई” है, जिसका स्वाद छोड़ने को ये तैयार नहीं?
अब देखना यह होगा कि विभागीय उच्चाधिकारी इस मामले में सख्त कदम उठाते हैं या फिर आदेशों को इसी तरह ठेंगा दिखाते हुए यह वन आरक्षी रुड़की रेंज क्षेत्र की सुरक्षाबल में ही जमे रहते हैं।
