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हरिद्वार
हरिद्वार ज़िले में इन दिनों खनन का खेल जोरों पर है। वैध और अवैध, दोनों तरह का खनन खुलेआम चल रहा है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल उठता है — वन निगम के नाम पर जो खनन कराया जा रहा है, उसमें नियमों की अनदेखी क्यों की जा रही है? सूत्रों के अनुसार, वन निगम में दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रॉली और डंपर ऐसे हैं जो बिना फिटनेस के ही खनन का काम कर रहे हैं। इन वाहनों को न तो सड़क पर चलने की अनुमति होनी चाहिए और न ही इन्हें खनन में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसके बावजूद, वन निगम के कर्मचारी और अधिकारी इन वाहनों पर मेहरबान दिखाई दे रहे हैं।ऐसे वाहन जो सड़कों पर चलने लायक नहीं हैं, वे वन आरक्षित क्षेत्र में खनन का खेल खेल रहे हैं। इनसे कभी भी बड़ी घटना घट सकती है। अगर इस दौरान किसी वन्यजीव की मौत होती है या पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है, तो इसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा — वन विभाग, वन निगम, जिला प्रशासन या फिर परिवहन विभाग?
इसी बीच आज एआरटीओ नेहा झा ने रूटीन चेकिंग के दौरान एक ट्रैक्टर का चालान किया और दो डंपरों को सीज़ किया है। नेहा झा ने बताया कि यह कार्रवाई नियमित जांच के दौरान की गई, जब उन्हें क्षेत्र में फिटनेस समाप्त हो चुके वाहनों के संचालन की जानकारी मिली।अब सवाल यह है कि जब ऐसे वाहन पिछले कई हफ़्तों से खनन कर रहे थे, तब परिवहन विभाग के अधिकारी कहां थे? और क्या अब यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी या यह सिर्फ एक दिन की खानापूर्ति साबित होगी?
क्योंकि यह मामला सिर्फ नियमों के उल्लंघन का नहीं, बल्कि वन्यजीवों की सुरक्षा और सरकारी सिस्टम की लापरवाही से जुड़ा है।
