हरिद्वार रुड़की
हरिद्वार वन प्रभाग की ओर से जारी आदेश में वन आरक्षी मोनू कुमार का प्रशासनिक स्थानांतरण रुड़की रेंज से खानपुर रेंज के लिए किया गया है। आदेश 10 जून 2025 को जारी हुआ था, जिसमें साफ निर्देश दिए गए थे कि तत्काल प्रभाव से नई तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करना होगा।वही उनके साथ एक वन दरोगा का भी स्थातरण हुआ था जों तब ही नई तैनाती पर पहुँच गया था।
लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि प्रशासनिक स्तर पर स्थानांतरण आदेश के बावजूद मोनू कुमार अब तक रुड़की रेंज में ही डटे हुए हैं। जबकि विभागीय स्थानतरण वाले कर्मी तुरंत अपनी नई तैनाती पर पहुंच गए लेकिन एक वन आरक्षी ऐसा है जिस पर पहले भी कई गंभीर आरोप लग चुके है उसमे चाहे वन्य जीव का शव मिलने के बाद केश न काटना, क्षेत्र में प्रतिबंधित पेड़ो का पातन कराना,बेरियर पर छापेमारी के दौरान स्पष्टीकरण पत्र मिलना,जैसे और भी कई गंभीर आरोप लग चुके है लेकिन फिर भी यह कर्मी किस आधार पर यहा तैनात है ज़ब विभागीय स्तर पर हुए स्थानतरण कर्मी को तुरंत रेंज से रिलीव कर दिया गया तो मोनू कुमार वन आरक्षी को क्यों नहीं रिलीव किया गया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वन दरोगा की ड्यूटी पर ड्यूटी करता है यह कर्मी, और क्या मना जाय विभागीय अधिकारियो की सह है या फिर वन क्षेत्रधिकारी की जों अभी तक इस कर्मी को रिलीव नहीं किया गया सवाल नए कार्यक्षेत्र में ज्वाइनिंग न करना नियमों की अनदेखी मानी जा रही है।

इस पूरे मामले ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आदेश का पालन न होने से यह भी साफ हो रहा है कि कहीं न कहीं विभागीय स्तर पर लापरवाही या प्रभाव का इस्तेमाल किया जा रहा है।
अब देखना यह होगा कि क्या वन विभाग इस पर कोई सख्त कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी यूं ही ठंडे बस्ते में चला जाएगा।क्योंकि इस वन आरक्षी पर बहुत से गंभीर आरोप लगे हुए है जिसमे यह जाँच के दायरे में भी आया हुआ है।
